राम संग चौदह बरस, झेल चुकीं संत्रास।
राम संग चौदह बरस, झेल चुकीं संत्रास।
पुन: नियति ने दे दिया, पृथक सिया वनवास।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’
राम संग चौदह बरस, झेल चुकीं संत्रास।
पुन: नियति ने दे दिया, पृथक सिया वनवास।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’