प्यास
प्यास है सिर्फ़ जल की नहीं,
कभी सपनों की, कभी खुशी की सही।
होठों पे सूखी हुई दुआएँ,
आँखों में चाहत की परछाइयाँ।
रेत के समंदर में भटके कदम,
उम्मीद के बादल खोजें हर दम।
कभी रिश्तों में सुकून की आस,
कभी मन में अपनेपन की प्यास।
मेहनत के पसीने में छुपा विश्वास,
हर संघर्ष में मिलता उजास।
प्यास सिखाती प्रयास करना,
हार कर भी फिर से चलना।
ये जीवन को आगे बढ़ाती,
हर अँधेरे में रोशनी लाती।
प्यास है जीवन का सुंदर सार,
यही देती हर मंज़िल का आकार।
कवि
विनेश