*डिजिटल युग*
जीवन की रुन – झुन की ताल बदल देता है,
संकट में फसते ही रार बदल देता है l
चढ़ता है सिर पर जूनून बनके जिस दिन,
लोगों के जीवन का सार बदल देता हैll
जोड़ता है पल में ब्रह्माण्ड एक जाल में,
दूर होने का यह अहसास बदल देता हैl
घिर जाए शक से अगर कोई प्राणी तो,
जीवन के साथी का अखित्यार बदल देता है ll
बात कोई अपनी हो या हो पूरे देश की,
क्षण में आंदोलन का रूप बदल देता हैl
चाहे रहे घर में विरक्त होकर दुनिया से,
सोते हुए मानव का संसार बदल देता हैll
©अमित मिश्र