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19 Sep 2025 · 1 min read

माँ

मेरा हृदय भर गया भावों से,
जब तुमने गले लगाया माँ।
नैनों से अश्रु छलक उठे,
जब तुमने प्रेम जताया माँ।।

ज्यादा मैं बातें कर न सकी,
समय की सुई गति पर थी।
देखती तुम्हें और सुनती रही,
मोह हृदय की अति पर थी।।

कुछ क्षण में ही विदा लिया,
समय भी रुक न पाया माँ।
नैनों से अश्रु छलक उठे,
जब तुमने प्रेम जताया माँ।।

बहना भी संग-संग मेरे थी,
तीनों के नैन सजल थे माँ।
ट्रेन की गति भी बढ़ने लगी,
हम तीनों ही विह्वल थे माँ।।

चरण-रज को माथे से लगा,
आशीष तुम्हारा पाया माँ।
नैनों से अश्रु छलक उठे,
जब तुमने प्रेम जताया माँ।।

@स्वरचित व मौलिक
कवयित्री: शालिनी राय ‘डिम्पल’
आज़मगढ़ उत्तर प्रदेश।

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