भाव नहीं होता यदि निर्मल
गीत…
भाव नहीं होता यदि निर्मल,
फिर निर्मल उद्गार न होता।
हमको तुमसे प्यार न होता,
तुमको हमसे प्यार न होता।।
खिल जाते हैं फूल हृदय में,
यौवन की अँगडाई पाकर।
होने लगते फिर अधरों पर,
कंपन अनुभावों को गाकर।।
होते तुम यदि पास नहीं तो,
मधुमय यह संसार न होता।
हमको तुमसे प्यार न होता,
तुमको हमसे प्यार न होता।।
जीवन के पथरीले मग में,
देख- देख तुमको हैं चलते।
जाने कितने स्वप्न सजीले,
मुस्काते पलकों में पलते।।
सूख हृदय के जाते उपवन,
सावन-सा व्यवहार न होता।
हमको तुमसे प्यार न होता,
तुमको हमसे प्यार न होता।।
एक अनोखा रिश्ता है यह,
अद्भुत है इसका अपनापन।
आह्लादित अतिशय होता है ,
रूप बसा करके अन्तर्मन।।
होता ना यूँ स्पर्श सुशोभित,
यदि रंजक मनुहार न होता।
हमको तुमसे प्यार न होता,
तुमको हमसे प्यार न होता।।
भाव नहीं होते यदि निर्मल,
फिर निर्मल उद्गार न होता।
हमको तुमसे प्यार न होता,
तुमको हमसे प्यार न होता।।
डाॅ. राजेन्द्र सिंह ‘राही’
(बस्ती उ. प्र.)