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19 Sep 2025 · 1 min read

भाव‌ नहीं होता यदि निर्मल

गीत…

भाव नहीं होता यदि निर्मल,
फिर निर्मल उद्गार न होता।
हमको तुमसे प्यार न होता,
तुमको हमसे प्यार न होता।।

खिल जाते हैं फूल हृदय में,
यौवन की अँगडाई पाकर।
होने लगते फिर अधरों पर,
कंपन अनुभावों को गाकर।।
होते तुम यदि पास नहीं तो,
मधुमय यह संसार न होता।
हमको तुमसे प्यार न होता,
तुमको हमसे प्यार न होता।।

जीवन के पथरीले मग में,
देख- देख तुमको हैं चलते।
जाने कितने स्वप्न सजीले,
मुस्काते पलकों में पलते।।
सूख हृदय के जाते उपवन,
सावन-सा व्यवहार न होता।
हमको तुमसे प्यार न होता,
तुमको हमसे प्यार न होता।।

एक अनोखा रिश्ता है यह,
अद्भुत है इसका अपनापन।
आह्लादित अतिशय होता है ,
रूप बसा करके अन्तर्मन।।
होता ना यूँ स्पर्श सुशोभित,
यदि रंजक मनुहार न होता।
हमको तुमसे प्यार न होता,
तुमको हमसे प्यार न होता।।

भाव नहीं होते यदि निर्मल,
फिर निर्मल उद्गार न होता।
हमको तुमसे प्यार न होता,
तुमको हमसे प्यार न होता।।

डाॅ. राजेन्द्र सिंह ‘राही’
(बस्ती उ. प्र.)

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