मैथिली बनाम मिथिला भाषा।
मैथिली बनाम मिथिला भाषा।
-आचार्य रामानंद मंडल।
कालब्रुक 1801 ई मे मिथिला क्षेत्र के भाषा के नाम मैथिली रखलन। परंतु कवि चन्दा झा 1886ई मे मिथिला भाषा मे मिथिला भाषा रामायण लिखनाई संपूर्ण कैलन ।1998ई मे साहित्य अकादमी नयी दिल्ली के सदस्य रामदेव झा भूमिका मे लिखैत हतन कि महराज लक्ष्मीश्वरसिंह आ हुनकर विद्वत मंडली के आग्रह पर कवीश्वर चंदा झा रामायणक रचना मिथिला भाषा मे करे लगलाह। मिथिला भाषा मे रामायण रचना भ रहल अछि से संवाद कानों-कान समग्र मिथिला मे पसरि गेल।
कविश्वर चंदा झा के जन्म 1830ई/1831ई मे पिंडारूच(दरभंगा/मधुवनी) मे भेल रहैन आ देहावसान 14दिसम्बर 1907 मे भे गेल रहैन।
म.म.पं.मुकुंद झा बक्शी मिथिला भाषामय इतिहास रचना 1926 मे कैलन आ प्रकाशन 1936 मे भेल । भूमिका 1936 मे मुकुंद झा बक्शी लिखैत छतन-समस्त मैथिल तथा अन्यान्य मिथिलाभाषा भिज्ञ पाठक महाभाग सं सविनय निवेदन।
परंतु संपादक पं शशिनाथ झा, कुलपति, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा 2021 ई मे अप्पन प्रस्तावना मे लिखैत छतन -मिथिला भाषामय इतिहास मैथिलीक प्रथम उत्थानयुगक रचना (1926ई) थिक। इ मिथिला भाषा के मैथिली भाषा मे रूपांतरण हय। कारण 2003ई मे मैथिली संविधान के अष्टम अनुसूची मे शामिल हो गेल रहय।
मिथिला भाषा संपूर्ण मिथिला के भाषा यथा बज्जिका अंगिका खोरठा आदि के द्योतक हय परन्तु मैथिली केवल सोतिपुरा के द्योतक हय।
भ भ पं मुकुंद झा बक्शी के जन्म 1869ई मे वर्तमान मधुबनी जिला के ढंगा हरिपुर मे भेल रहैन आ देहावसान 1937ई मे भे गेलैन।
मैथिली नाम निर्धारण के बादो कविश्वर चंदा झा के मिथिला भाषा रामायण आ म म पं मुकुंद झा बक्शी के मिथिला भाषामय इतिहास संपूर्ण मिथिला के भाषा के गौरवान्वित क रहल हय।
-आचार्य रामानंद मंडल सीतामढ़ी।