जीवन से अपेक्षाएँ
जीवन से अपेक्षाएँ
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जीवन से अधिक अपेक्षाएँ रखना प्रायः निराशाओं का कारण बनता है। इसलिए आवश्यक है कि हम व्यर्थ और अवास्तविक अपेक्षाओं से स्वयं को दूर रखें और इसके विपरीत, कम तथा सार्थक अपेक्षाओं को महत्व दें। यही संतुलित दृष्टिकोण हमें शांति, संतोष और वास्तविक सुख की ओर ले जाता है।
डॉ. फ़ौज़िया नसीम शाद