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19 Sep 2025 · 1 min read

रूह से मुलाकात

अर्ज़ है…
कभी रूह से इक मुलाकात होती !
ख़ुद से ख़ुद ही की कभी बात होती !
क्या खूबियां और क्या खामियां हैं ?
तनक़ीद-ए-मुसलसल बरसात होती !!

@स्वरचित व मौलिक
शालिनी राय ‘डिम्पल’…✍️

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