*विषय -प्रभाती*
विषय -प्रभाती
विधा-मुक्तक
सुबह सुंदर,सुहानी है,लगें दिलकश अदाएँ सब।
बदलता रूप है दिनकर,दिखाता है कलाएँ सब।*
मधुर मनुहार भँवरों से,थिरकती तितलियाँ करतीं,*
किरण अनुबंध वसुधा से,हटाता है बलाएँ सब।
डॉक्टर रागिनी स्वर्णकार ,इन्दौर