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19 Sep 2025 · 1 min read

*विषय -प्रभाती*

विषय -प्रभाती
विधा-मुक्तक

सुबह सुंदर,सुहानी है,लगें दिलकश अदाएँ सब।
बदलता रूप है दिनकर,दिखाता है कलाएँ सब।*
मधुर मनुहार भँवरों से,थिरकती तितलियाँ करतीं,*
किरण अनुबंध वसुधा से,हटाता है बलाएँ सब।

डॉक्टर रागिनी स्वर्णकार ,इन्दौर

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