याद राम जी को कर-कर के
याद राम जी को कर-कर के
लोचन से आँसू बहते हैं।
ह्रदय बहुत पीड़ित है उनका
फिर भी कितना कुछ सहते हैं।
जनक दुलारी राम लखन सब
कष्ट वनों के झेल रहे हैं,
इसीलिए सब सुख अर्पण कर
नंदीग्राम भरत रहते हैं।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’