( हास्य - व्यंग्य छत्तीसगढ़ी )
( हास्य – व्यंग्य छत्तीसगढ़ी )
लैका मन नौकरी करत अमेरिका मा बस गे हवय,
अउ दाई ददा मन गांव मा खातू कचरा कस परे हवय,
उमन ला उहां ले जाय के लैका मन के मन करय नइ
अउ खुदो मन गांव म पांच बछर पहली गोड़ धरय नइ,
लैका मन परमानेंट अमेरिका म रहे के मन बना ले हवय,
अमेरिकन मन के गोड़ म अपन मुड़ी मड़ा दे हवय।
अब अमेरिकन स्टाइल म ही जीही उन अपन ज़िन्दगी,
अउ मरत तक भारतीय तरीका से सिरिफ पैसा जोरही।
हार खा के दाई ददा मन घर म कुकुर पाल ले हवय,
सिनियर सिटीजन आफिस म अपन नाम डाल दे हवय।
कैसनो करके बुढुवा बुढवी मन अपन बेरा काटत हवय,
नाती नतरा संग खेले के बदला राधे राधे गावत हवय।
कांटा खूंटी से अटे बुढुवा मन के जिन्गी के कोठार हवय,
अब ऐसन सियान मन ला बस मरे के इन्तजार हवय्।
( डॉ संजय दानी )