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19 Sep 2025 · 1 min read

सद्-बुद्धि प्रार्थना

अब तक तो हम समझते थे कि
जन्मदिन की शुभकामनाएं दी जातीं हैं ,
अब तो यह दस्तूर बदल गया है लोगों से
जबरदस्ती मांग कर शुभकामनाएं ली जातीं हैं ,

लोगों के साथ धोखा करो ,
उनसे झूठे वादे करो,
छल प्रपंच में उन्हें उलझाओ,
फिर उनकी भलाई के गीत गाओ ,

क्या क्या यही सब देखने के लिए
लोकतंत्र में रह गया है ,
क्या राजनीति में ज़मीर और ईमान
इतना गिर गया है ,

लोगों को बेरोजगार बनाओ ,
फिर मुफ्त अनाज के लिए उन्हें ,
भिखारी बना अपनी पीठ थपथपाओ ,

टैक्स लगाकर जनता को चूसो ,
पूंजीपतियों की तिजोरी भरो,

सेना का मनोबल गिराओ ,
विश्व में देश की साख पर बट्टा लगाओ ,
जोड़-तोड़ की राजनीति और वोट चोरी से
अपनी सत्ता बचाओ ,

चुनाव आयोग और न्यायपालिका को
अपनी उंगली पर नचाओ ,

विरोधियों को झूठे प्रकरण में फंसाओ ,
युवाओं को भ्रमित कर उन्हें आपस में लड़वाओ ,

आंदोलन को उभरने से पहले दबाओ ,
शांतिपूर्ण आंदोलन में अराजक तत्वों से हिंसा करवाओ ,

देश की अर्थ व्यवस्था चौपट भले ही हो पर
पूंजीपतियों के व्यापार में वृद्धि हो ,

क्या यही अमृत काल का परिदृश्य है ?
जिसमें वर्तमान राजतंत्र व्यस्त है ,

अवतारी युगपुरुष के पांव तो कब्र में लटके हैं ,
पर छप्पन इंच के झटके अब तक कुर्सी से चिपके हैं,

पता नही कब ईश्वर उन्हें सद्-बुद्धि देकर
देश का उद्धार करेंगे ,
वरना वो तो अपने दंभ में देश को
अधोगति की ओर अग्रसर कर
रसातल में पहुँचा कर ही दम लेंगे।

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