वो होश में भी ही। रहे कब
वो होश में ही रहे कब, जो बेहोश वो आज है।
उनको मद है दौलत का, रंगीन उनके मिजाज है।।
वो होश में ही रहे कब————————–।।
उनको मद है जवानी का, शरीर उनका है खूबसूरत।
उनको चाहिए रम का प्याला, सबाब की कोई सूरत।।
उनको शौक है हुर्रों का खूब, उनका यह एक राज है।
वो होश में ही रहे कब——————————।।
व्यापार वो वफाओं का, करते हैं बेवफाई से।
वो रमल में अपनी इज्जत,लुटाते है वफाई से।।
बस चाहिए उनको धुंआ, देने को अपना ताज है।
वो होश में ही रहे कब——————–।।
अजीब है उनका जीवन, और अजीब ख्वाब है।
हो जाये खाक चाहे घर भी, मौजों के वो नवाब है।।
गाते हैं गीत दिल के, हाथों में उनके साज है।
वो होश में ही रहे कब——————-।।
रोग जिसका है उनको, हम दवा नहीं है उसकी।
हमसे नहीं उनको मतलब, जरूरत है उनको उसकी।।
जो बुझा दें प्यास दिल की, उससे ही उनको काज है।
वो होश में ही रहे कब————————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)