बड़का लइका
छोटपन के उ जोन्हि तारा याद दिलावेला
बड़का लइका हमरै हमके आँख देखावेला
पहिला कोवर चिरई नामे
दूसर बुधनी गइया क
घूम घूम के खात रहल उ
रोटी रोज बकईयां क
पढ़े लगल जब क ख ग घ पाठ पढ़ावेला
बड़का लइका हमरै हमके आँख देखावेला
गुमसुम अब उदास रहेला
ना बोले बतियावेला
हालचाल त दूरे हव
ना हमके देखल चाहेला
अपने हार क कारण बबुआ हमके समझेला
बड़का लइका हमरै हमके आँख देखावेला
इच्छा मार के हमहू बहुतै
सपना देखले रहली
छठी मईया के फुले क
लोटा मनले रहली
काहे हमसे अलगे आपन सपना बुझेला
बड़का लइका हमरै हमके आँख देखावेला
का शंकर के माई
तोहके लाज ना आवेला
दू सौ के धोती पर
कोई चकती साटेला
मेहरारून से बात करे में रोंवा काँपेला
बड़का लइका हमरै हमके आँख देखावेला
बाँट गयल मोर चुड़ी कंगन
केकर लागल हाय रहल
एगो कनफुल खातिर हमके
मरले मोर जंवाय रहल
अब्बो देख के नई बहुरिया मनवा तरसेला
बड़का लइका हमरै हमके आँख देखावेला
पुरा जवानी बीत गयल जब
बिना साज सिंगार के
अब का चाही हमके सिवा
रोटी अउर अचार के
पाकल बार पे गजरा नाही हमके भावेला
बड़का लइका हमरै हमके आँख देखावेला
हमरे भीतर तोहरे खातिर
कउनो नाही रोष ह
भले ना तु जीत पईला बबुआ
एतनो पर संतोष ह
आपन तरकस खाली करके हम पे भड़केला ?
बड़का लइका हमरै हमके आँख देखावेला
~ धीरेन्द्र पांचाल