ज़िन्दगी के रंग
किसी की रात उजाली
किसी का दिन अंधेरा है।
किसी की खुशियाँ अधूरी,
किसी की ग़म से रिश्ता है
कभी हँसी के हैं मोती ,
कभी आँखों में पानी है।
कभी सपनों का है मेला,
कभी वीरानी वीरानी है।
कोई तन्हाई में रोता है,
कोई भीड़ में अकेला है।
हर चेहरे पे इक किस्सा
हर किसी की अपनी कहानी है।
रूबी चेतन शुक्ला