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18 Sep 2025 · 1 min read

#लघुव्यंग्य :-

#लघुव्यंग्य :-
■ किसी भी मंशा से सही।।
【प्रणय प्रभात】
“मुंह लगाएं या न लगाएं, अपनाएं या ठुकराएं।
मगर निरीह नेताओं को, न लतियाऐं, न गलियाऐं।।
चुनावी काल में ही सही, आपके चरणों में नत तो हैं।
सुविधा अच्छी के लिए, सत्ता की मच्छी के लिए,
बगुले ही सही, भगत तो हैं।।
वो तो अब मान-सरोवर में भी नहीं पाए जाते।
अगर ये हंस होते तो गली में नज़र आते??”
😊😊😊😊😊😊😊😊😊
-सम्पादक-
●न्यूज़&व्यूज़●
(मध्य-प्रदेश)

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