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18 Sep 2025 · 2 min read

मोदी जी : जन्म दिवस विशेष-- मोदी! तुम सौ बरस तक अगुवाई करना—

तुम पुरातन भी हो, आधुनिक भी हो
तुम सनातनी भी हो प्रगतिवादी भी हो
तुम गाँववासी भी शहरी-महानगरी भी,
तुम राष्ट्रीय भी हो, अंतर्राष्ट्रीय भी
तुम यथोचित समय काल पर
भारतवर्ष के भाग्योदय का
अवलंब बने, कारक बने, कर्ता बने,
यह ऊर्जा, यह गति बिखरने न देना,
मोदी! तुम कम से कम,
उम्र के सौ बरस तक अगुवाई करना।

ईश्वर करें तुम सहस्त्रायु होओ,
परमेश्वर करें तुम चिर-युवा रहो,
इस महान मर्यादित राष्ट्र की
खोई अस्मिता, खोई धर्म-संस्कृति
तोड़े दबे कुचले मंदिरों धर्मस्थलों के
पुनरुद्धार का अभियान तुम हो,
सनातन राष्ट्रीयता का प्राण तुम हो,
अनवरत संघर्ष की आत्मा हो,
विजय की पराकाष्ठा हो,
इस विशालतम राष्ट्र का
करोड़ों ज़रूरतमंद जन मानस
उत्साहित उल्लासित है, तुमसे,
देश विश्वपटल पर आज,
चमकता है, चहकता है,
राष्ट्र को पुनः स्वर्ण-काल का,
तुम्हीं ने स्वप्न दिया, तुम्हीं पूरा करना,
मोदी! तुम कम से कम,
उम्र के सौ बरस तक अगुवाई करना।

कौन कहता है,
पिचहत्तर बरस के हुए तुम,
कौन कहता है,
पच्चीस ही बरस रह गये अशेष,
कर्मयोगी हो त्यागी हो वैरागी हो
ईश्वर ने सोद्देश्य भेजा है तुम्हें,
संताें ऋषियों वेदों पुराणों की जननी
महान भारत माता के मर्यादाओं की,
पुनर्स्थापना के लिए,
तुम पच्चीस के हुए,
पिचहत्तर तुम्हारे शेष रहे,
हाथ में परचम तुम्हारे,
देश के बच्चे बूढ़े युवा,
सरपट दौड़ रहे हैं,
अनुसरण में तुम्हारे,
इस सनातनी राष्ट्र का,
संपूर्ण जागरण कराना
जम्बूद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्ते भारतवर्षे
पुनः वैभवशाली सोने की चिड़िया बनाना,
कामचोरों अय्याशों अपराधियों भ्रष्टाेंं से,
भारतभूमि को असल मुक्त कर जाना
जात पात धर्म ऊँच नीच की
बेड़ियों से राष्ट्र को विमुक्त कर जाना,
मोदी! तुम कम से कम,
उम्र के सौ बरस तक अगुवाई करना।
—-
केदार बद्री विशाल से कन्याकुमारी तक,
कामाख्या कालीमठ से द्वारका तक
हिमालय की कंदराओं से
राष्ट्र के गाँवों-गलियों तक,
गंगा यमुना के प्रवाह से
हिंद-अरब सागर तक
सभी ने सौंपा है उत्तरदायित्व तुम्हें,
युगों में एक बार जन्मती हैं,
माँ ऐसा सुपूत,
युगों में राष्ट्र को मिलता है,
ऐसा महानायक,
चल पड़ा है, भारतवर्ष अब
गति यह टूटने न देना,
कठोपनिषद का मूल मंत्र-
विवेकानंद का वही सूत्र-
‘उतिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निवोधत्’
संकल्प लेकर चले हो,
शब्दशः पूर्ण कर जाना,
मोदी! तुम कम से कम,
उम्र के सौ बरस तक अगुवाई करना।

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