सुविधा सबको चाहिए, ढूँढे सभी विकल्प।
सुविधा सबको चाहिए, ढूँढे सभी विकल्प।
सुखमय इस संसार में, रहें बहुत ही अल्प।।
संसाधन के होड़ में, सुख का छूटा साथ।
जिसकी क्षमता जो रही, शिकन उसी के माथ।।
दौड़ लगाते लोग हैं, लिए जीत का भाव।
भौतिकता के संग में, मिलता रहता घाव।।
आओ बैठो साथ में, लेकर मन का भार।
जुड़ता चित ज्यों ही यहाँ, बनता सुख आधार।।
“पाठक” कहता प्रेम को, सभी सुखों का सार।
मिलता है उस रूप में, जैसा है व्यवहार।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)