सूना आँगन हो गया, बेटी के बिन आज।
सूना आँगन हो गया, बेटी के बिन आज।
मंगल बेला में विदा, अपने घर की लाज।
अपने घर की लाज, गई ससुराल पिया घर।
बेटी सिया समान, राम सम उसे मिला वर॥
लगी ‘सर्व प्रिय’ आस, मिले सुख अब दिन-दूना।
बाबुल का घर, द्वार,. और है आँगन सूना॥
राजेश पाली “सर्वप्रिय”