Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
18 Sep 2025 · 2 min read

प्यार की पुष्पांजलि

प्रेम एक ऐसी अनुभूति है, जो मानव हृदय की गहराइयों से लेकर दैवीय चेतना के शिखर तक प्रवाहित होती है। प्रेम वह ऊर्जा है, जो शिव और शक्ति के रूप में सृजन और संहार का संतुलन बनाती है, राम और सीता के रूप में कर्तव्य और समर्पण का आदर्श प्रस्तुत करती है और राधा-कृष्ण के रूप में आत्मा की अनंत भक्ति और प्रेम की मधुर लीलाओं को रचती है। यह पुस्तक इन्हीं दैवीय प्रेम और सांसारिक प्रेम की कोमल अनुभूतियों का एक सुंदर समन्वय है, जो कविताओं के माध्यम से आपके समक्ष प्रस्तुत है।

शिव और शक्ति का प्रेम सृजन का मूल है, जहाँ एक की पूर्णता दूसरे के बिना अधूरी है। राम और सीता का प्रेम कर्तव्य, विश्वास और त्याग की मिसाल है, जो सांसारिक जीवन में प्रेम की मर्यादा को दर्शाता है। वहीं राधा और कृष्ण का प्रेम वह आलौकिक मधुर रस है, जो भक्ति और प्रेम की सीमाओं को लांघकर आत्मा को परम से जोड़ता है। इन दैवीय प्रेम कथाओं का सांसारिक प्रेम से समन्वय इस पुस्तक की कविताओं में इस तरह बुना गया है कि प्रत्येक पंक्ति आपके हृदय के तारों को छू लेंगी। ये कविताएँ केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि उन अनुभूतियों का दर्पण हैं, जो प्रेम के विभिन्न रूपों को प्रतिबिंबित करती हैं।

‘प्यार की पुष्पांजलि’ आपको उस यात्रा पर ले जाने का एक प्रयास है जहाँ प्रेम की सांसारिक और दैवीय सीमाएँ धुंधली होने लगती हैं। आप प्रेम की उस अनंत धारा में तैरता हुआ महसूस कर पायेंगे जो शिव-शक्ति की एकता, राम-सीता की निष्ठा और राधा-कृष्ण की भक्ति में समाहित है। जहाँ हर शब्द एक प्रार्थना है और हर कविता एक संगीत है।

– के. के. राजीव

Loading...