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18 Sep 2025 · 1 min read

जानती हूँ आ रहा है, अब निकट अवसान मेरा।

जानती हूँ आ रहा है, अब निकट अवसान मेरा।
देखती हूँ आँख भर कर, छूटता दालान मेरा।

सोच-चिंता-त्रास-तड़पन, साथ नित मेरे रहे हैं,
ले चलूँगी साथ सबको, बाँध दो सामान मेरा।

© सीमा

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