जानती हूँ आ रहा है, अब निकट अवसान मेरा।
जानती हूँ आ रहा है, अब निकट अवसान मेरा।
देखती हूँ आँख भर कर, छूटता दालान मेरा।
सोच-चिंता-त्रास-तड़पन, साथ नित मेरे रहे हैं,
ले चलूँगी साथ सबको, बाँध दो सामान मेरा।
© सीमा
जानती हूँ आ रहा है, अब निकट अवसान मेरा।
देखती हूँ आँख भर कर, छूटता दालान मेरा।
सोच-चिंता-त्रास-तड़पन, साथ नित मेरे रहे हैं,
ले चलूँगी साथ सबको, बाँध दो सामान मेरा।
© सीमा