...रोने से क्या होता...
रोने से यदि कुछ होता तो फिर रोना अच्छा है,
रोने से जब कुछ होता नहीं,
तो फिर क्यों रोना अच्छा है।
अरे बात–बात पे आँखों से क्यों
नीर बहाते रहते हो,
हर चोट का मलहम ढूँढ़ो,
क्यों ज़ख़्म दिखाते रहते हो।
बिन मौसम की बारिश से
धरती में उपज नहीं होती,
बस दलदल बन जाता जीवन,
जहाँ खुशियाँ नहीं रह पाती हैं।
मुस्कान ही है असली दवाई है
जो दिल को सुकून दिलाती है,
रोने से नहीं निकलता हल
हिम्मत ही राह दिखाती है।
रूबी चेतन शुक्ला