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17 Sep 2025 · 1 min read

समूचे विश्व में अपना भी स्वाभिमान निखरेगा,

समूचे विश्व में अपना भी स्वाभिमान निखरेगा,
हमेशा होगी जय–जयकार संविधान निखरेगा।
न वादों पे भरोसा है न सत्ता से कोई आशा,
पढ़ाओ बेटियों को तुम तो हिंदुस्तान निखरेगा।।

लेखक/कवि
अभिषेक सोनी “अभिमुख”
ललितपुर, उत्तर–प्रदेश

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