समूचे विश्व में अपना भी स्वाभिमान निखरेगा,
समूचे विश्व में अपना भी स्वाभिमान निखरेगा,
हमेशा होगी जय–जयकार संविधान निखरेगा।
न वादों पे भरोसा है न सत्ता से कोई आशा,
पढ़ाओ बेटियों को तुम तो हिंदुस्तान निखरेगा।।
लेखक/कवि
अभिषेक सोनी “अभिमुख”
ललितपुर, उत्तर–प्रदेश