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17 Sep 2025 · 2 min read

एक कालजई विदाई गीत की समीक्षा ,

“बाबुल की दुआएं लेती जा” गीत भारतीय फिल्म संगीत में बेटी की विदाई और पिता के भावनात्मक आशीर्वाद से जुड़ा एक कालातीत क्लासिक है, जो पिता के प्यार, बेटी के प्रति लगाव और भविष्य के लिए मंगलकामनाओं को दर्शाता है। यह गीत पिता की बेटी के लिए गहरी चिंता, उसके उज्ज्वल भविष्य की आशा और नए जीवन में सुख की कामना व्यक्त करता है।
गीत की प्रासंगिकता:
• पितृ प्रेम का प्रतीक:
यह गीत पिता और बेटी के बीच गहरे भावनात्मक बंधन को दिखाता है, खासकर विदाई के समय। पिता अपनी बेटी को आशीर्वाद देते हुए कहती हैं कि वह जीवन में खुश रहे और उसे ससुराल में प्यार मिले।
• विदाई का भाव:
गीत बेटी के घर से विदा होने पर पिता के मन में उठने वाले दर्द और खुशी के मिश्रित भावों को व्यक्त करता है।
• सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ:
भारतीय संस्कृति में, बेटी की विदाई को एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक अवसर माना जाता है। यह गीत उस परंपरा और भावना का प्रतिनिधित्व करता है।
• “बाबुल” शब्द का अर्थ:
“बाबुल” पिता के लिए एक पुराना हिंदी शब्द है, जो बेटी के प्रति स्नेह और लगाव को दर्शाता है। इस शब्द का उपयोग अक्सर बेटी की विदाई के समय किया जाता है, जैसा कि इस गीत में है।
• सदाबहार आकर्षण:
साहिर लुधियानवी के मार्मिक बोल और मोहम्मद रफ़ी की भावपूर्ण आवाज़ ने इस गीत को अविस्मरणीय बना दिया है। यह आज भी भारतीय विवाहों और विदाई के गीतों में प्रासंगिक है।
संक्षेप में, “बाबुल की दुआएं लेती जा” केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह पिता के आशीर्वाद, बेटी के प्रति उसके प्रेम और उसके नए जीवन की मंगल कामनाओं का प्रतीक है ।
और इस गीत एक अनोखी बात है मित्रों! इस अमर गीत की रचना करने वाले शायर/ गीतकार साहिर लुधियानवी जी थे । जो स्वयं अविवाहित थे । परन्तु पिता और पुत्री के अटूट संबंध को दर्शाता गीत उन्होंने कितने भावपूर्ण हृदय से लिखा है । इसे गाने वाले गायक रफी साहब बेशक दो पुत्रियों के पिता थे इसीलिए उनको इस भाव में डूबना ही था मगर जिसका विवाह नहीं हुआ ,उसे कैसे अनुभव हुआ ! मगर कहते हैं न ” जहां न पहुंचे रवि ,वहां पहुंचे कवि ” तो साहिर लुधियानवी जी ने पिता और पुत्री के उस दर्द भरे विछोह को हृदय से कल्पना करके ,फिर महसूस करकर लिखा है । आज ऐसे न लिखने वाले ,न गाने वाले । यह गीत युगों युगों तक अमर रहेगा । जब जब बेटी के विवाह के पश्चात विदाई होती तभी यह गीत हर पिता के दिल में भावना बनकर उमड़ पड़ता है । हर पिता का आँखें ऐसे क्षण में भीग जाती है । इस भावपूर्ण गीत की रचना करने वाले अमर शायर/ गीतकार साहिर लुधियानवी जी को हमारा शत शत नमन 🙏

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