#क़तआ (मुक्तक)
#क़तआ (मुक्तक)
फ़र्क़ बहुत है…!!
(प्रणय प्रभात)
“कहने वाले जाने क्या क्या कहते हैं,
सहने वाले देखी सब कुछ सहते हैं।
लेकिन दोनों नस्लों में है फ़र्क़ बहुत,
वो पस्ती में ये मस्ती में रहते हैं।।”
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संपादक
न्यूज़&व्यूज
(मध्यप्रदेश)