ना मिले कभी रंग मिरे,उस जादूगर रंग वाले से।
ना मिले कभी रंग मिरे,उस जादूगर रंग वाले से।
जो अपने रंग-आवर में, कितनों को रंग लेता है।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”
ना मिले कभी रंग मिरे,उस जादूगर रंग वाले से।
जो अपने रंग-आवर में, कितनों को रंग लेता है।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”