प्रेम नहीं हृदय में समाता
प्रेम नहीं हृदय में समाता
रात दिन तेरा ही गुण गाता
किस नगरी में तू जा कर छुप जाता
ढूंढ ढूंढ मेरा मन व्याकुल हो जाता
अंखियों से तू कहीं नजर ना आता
मन को सदा तू ही है भाता….!!!
मधु गुप्ता “अपराजिता”
प्रेम नहीं हृदय में समाता
रात दिन तेरा ही गुण गाता
किस नगरी में तू जा कर छुप जाता
ढूंढ ढूंढ मेरा मन व्याकुल हो जाता
अंखियों से तू कहीं नजर ना आता
मन को सदा तू ही है भाता….!!!
मधु गुप्ता “अपराजिता”