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17 Sep 2025 · 1 min read

यूँ ही नहीं कोई तुम्हारे दर पे आता।

यूँ ही नहीं कोई तुम्हारे दर पे आता।
कुछ तो तुम्हारा उससे है नाता
ऐसे ही नहीं कोई साथ तुम्हारे खाना खाता
जितना ऋण है उसका वो लेने आता।।

अगर तुम मना करने के बाद भी!
बरबस ही तुम उसे खाना खिलाते हो
तो वो तुम नहीं खिलाते !
वो हक है उसका!
इसलिए भेजा है विधाता ने पास तुम्हारे
वो सिर्फ अपना हक है लेने आता।।

हरमिंदर कौर, अमरोहा

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