( छत्तीसगढी---हास्य-- व्यंग्य
( छत्तीसगढी—हास्य– व्यंग्य
अंतर्जातीय विवाह )
बिदेसी सिगड़ी हवय अउ निच्चट देसी हमर हंड़िया हवय,
रंधैया बीबी किरिस्चन अउ खवय्या हसबैंड बनिया हवय
तभो ले भात दार चुरे मा कोनो परेसानी नइ होवय संगी ,
कारकी इंहा के आगी पानी निच्चट छत्तीसगढिया हवय।
हमर शहर के कतकोन घर मा ऐसने मिंझरा खाना बनथे,
खान पान एक कोती इंखर लैका मन घलो मिंझरा हवय।
चिरावन लकड़ी के बदला एलपीजी जब ले जलाय लगेन,
ये देस म भौजी कहां जाति पाति के अब धुंगिया हावय।
देश भर म हमर किसम किसम के रिश्तेदार हवय अउ
मुहल्ला म हर जाति के लोग हमला अपन कहवय्या हवय।
हमर मुहल्ला म धर्म जाति के झगड़ा न्इ होवय कारकी,
बिभिन्न धर्म जाति के लोगन के आपस म रिश्ता हवय।
साफ़्ट वेयर हा हमर बिग्यानिक नालेज भर नइ बढाय हे,
लैका मन के सामाजिक अध्ययन घलो अब बढ़िया हवय्।
( डॉ संजय दानी दुर्ग सर्वाधिकार सुरक्षित )