मेरी शैक्षणिक ज़िन्दगी के मूल सिद्धांत
शिक्षण एक कला है, शिक्षक है कलाकार।
शिक्षार्थी में स्नेह से भरता है संस्कार।। -‘सावन’
मैं विद्यार्थियों को कलात्मक शैली में पढ़ाने की कोशिश करता हूं। मैंने ‘कबीर की साखियां’ गेय शैली में पढ़ाई है। विद्यार्थियों ने भी पूरे मनोयोग से साथ दिया है। सहज एवं सरस भाषा में कविता को सस्वर पढ़ाने से विद्यार्थी भी खुशी-खुशी पढ़ते हैं और भावार्थ को सही से समझते हैं।
‘कबीर की सखियां’ में ज्ञानमार्गी शाखा के कवि कबीर दास ने जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को समझाते हुए कहा है कि हमें मन को एकाग्र कर पूरी सत्य निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीवन यापन करना चाहिए। तभी सफलता रूपी मोती की प्राप्ति होती है। मैंने स्मार्ट बोर्ड पर मानसरोवर में जल और हंस के छवि उकेरखर दोहे का भावार्थ समझाने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा है कि इस जगत में प्रेमी को ढूंढने से पूर्व स्वयं को प्रेमी बनाओ तब जगत में प्रेमी ही प्रेमी नजर आएंगे। उन्होंने ज्ञान की तुलना हाथी से करते हुए समझाया है कि हमें ज्ञानी बनना चाहिए लेकिन सहजता और विनम्रता के साथ। इस दोहे को भी सहजता से विद्यार्थियों को समझने हेतु मैंने कलात्मक शैली को अपनाया है ।
पक्ष-विपक्ष के विवाद में उलझे हुए अबोध लोगों को समझाते हुए कविवर कबीर कहते हैं कि हमें निष्पक्ष भाव से ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए अर्थात् अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए तभी लक्ष्य की प्राप्ति होगी।
उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों को संबोधित करते हुए सुझाया है कि ईश्वर एक है और हम हम सब उसी के बंदे हैं । हमें आपस में मिलजुल कर लोकहित में जीवन यापन करना चाहिए। धर्म और ईश्वर के नाम पर मतभेद और मनभेद उचित नहीं है। जुड़ाव में ही ज़िन्दगी है।
कबीर का मानना है कि उच्च जाति में जन्म लेना बड़ी बात नहीं है, हमारा कर्म उच्च होना चाहिए । वह जातिवाद का विरोध करते हुए कर्म वाद पर विशेष बल देते हैं और कहते हैं कि बड़ा और पूजनीय बनने के लिए हमारा कर्म बड़ा या उत्तम होना चाहिए। वह सोने के कलश में भरे हुए निंदनीय सुरा का उदाहरण देते हुए कहते हैं की उच्च कुल में जन्म लेने के बाद भी यदि हमारा स्वभाव एवं कर्म उत्तम नहीं है तो उच्च कूल में पैदा होने से कोई फायदा नहीं अर्थात् हमें उत्तम कर्म करना चाहिए।
मैंने ‘कबीर की साखियां’ गेय शैली में पढ़ाई है। सम्बन्धित ज्ञानवर्धक वीडियो Dr. Sunil Chaurasia’Sawan’ नामक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है, लिंक संलग्न है।
शुक्रिया।
– सुनील चौरसिया
स्नातकोत्तर शिक्षक (हिन्दी),
केन्द्रीय विद्यालय गांगरानी कुशीनगर, उत्तर प्रदेश।