नया सिन्दूर ... (क्षणिका )
नया सिन्दूर … (क्षणिका )
बिखर गया
रंग बनकर
फर्श पर
मिट गया
एक बेदस्तक
आवाज़ के साथ
कल
आज
और कल का
फर्क
बस सामने था
पुरानी बाहों में
मेरे विशवास की
खिल्ली उड़ाता
नया सिन्दूर
सुशील सरना
नया सिन्दूर … (क्षणिका )
बिखर गया
रंग बनकर
फर्श पर
मिट गया
एक बेदस्तक
आवाज़ के साथ
कल
आज
और कल का
फर्क
बस सामने था
पुरानी बाहों में
मेरे विशवास की
खिल्ली उड़ाता
नया सिन्दूर
सुशील सरना