दो भाषाओं और दो लिपियों से सृजित है यह पावन चिह्न : सावन
दो भाषाओं और दो लिपियों से सृजित है यह पावन चिह्न : सावन
ओम् और स्वास्तिक चिह्न की भांति यह एक ऐसा पावन चिह्न है जिसमें राम-जानकी, रमजान, प्रीति, रज़ा इत्यादि मनहर भाव समाहित हैं। चिन्ह है एक और भाव हैं अनेक। इसमें गणित का पाई भी है जिसका मान अनंत होता है। बिना लेखनी उठाए आप सहज भाव से राम-जानकी लिख सकते हैं। बिना लेखनी उठाएं आप पवित्र भाव से रमजान, रज़ा इत्यादि लिख सकते हैं। जगत को प्रीति, नीति और भक्ति के रंगों से रंगना। इसी का नाम है दिव्य ज्योति रंजना। यही इस अनुपम चिह्न का आधारभूत शब्द है, प्राणतत्व है। जिसमें असीम शक्तियां समाहित हैं। यह हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में सृजित पाक चिह्न है तथा इसमें रोमन लिपि एवं देवनागरी लिपि का भी सुगम संगम है। इस चमत्कारपूर्ण चिह्न को पवित्र भाव से बार-बार लिखने से सुख-शांति की प्राप्ति होती है। राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने वाला यह शुभ चिह्न हिन्दू कुटुम्ब के साथ-साथ मुस्लिम सदन में भी सुशोभित हो सकता है। इससे जीवन में ऋद्धि-सिद्धि की श्रीवृद्धि होती है। बिना लेखनी उठाएं सात्विक भाव से इस शुभ चिह्न को रचने-गढ़ने से मन एकाग्र होता है। जीवन में सफलता मिलती है। यह पुण्य चिह्न एक दृष्टि है जिसमें समष्टि सृष्टि है।
डॉ. सुनील चौरसिया ‘सावन’
स्नातकोत्तर शिक्षक (हिन्दी)
केन्द्रीय विद्यालय गांगरानी, कुशीनगर, उत्तर प्रदेश।
9044974084