#क़तआ (मुक्तक)
#क़तआ (मुक्तक)
■ सीढियां…
【प्रणय प्रभात】
“छत पे जा कोने में छुप जाती कहीं,
और अपने आप को खोती नहीं।
सीढ़ियां होती हैं केवल उम्र की,
ज़िन्दगी की सीढ़ियां होती नहीं।।”
मंतव्य उन अग्रणी पीढ़ियों से है, जो सीढ़ियों की तरह ऊपर ले जाती हैं और एक समय बाद अधिक उम्र का हवाला देकर उपेक्षा के साथ एकाकीपन के हवाले कर दी जाती हैं। कृतज्ञता के प्रतीक श्राद्ध पक्ष में उक्त मुक्तक को पूर्वजों के प्रति एक आदरांजलि मानियेगा।।
【प्रणय प्रभात】
●संपादक/न्यूज़&व्यूज़●
श्योपुर (मध्यप्रदेश)