नैना बहु नीर बहाते हैं
एक झलक पाने को व्याकुल,नैना मेरे हो जाते हैं।
याद आपकी जब-जब आती,नैना बहु नीर बहाते हैं।।
मेरे अंतस की स्मृतियों में,पापा बस नाम तुम्हारा है।
याद आपको हर दिन करके, रो-रोकर समय गुजारा है।
तुम बिन जीवन सूना लगता, खुशियाँ भी तनिक न भाती हैं।
साँझ सबेरे सारा दिन बस,स्मृतियाँ हमको तड़पाती हैं।
देख आपकी सुन्दर छवि हम,बस दिल अपना बहलाते हैं।
याद आपकी जब-जब आती, नैना बहु नीर बहाते हैं।।
जानें किस कारण से हमको,पापा तुम तन्हा छोड़ गए।
आखिर क्या ग़लती थी मेरी,जो हमसे मुख तुम मोड़ गए।
तुम बिन कैसे जी पाएंगे, थोड़ा सा तो सोचा होता।
यदि सर होता हाथ आपका, घुट-घुट कर कभी न मैं रोता।
आ जाओ जीवन में फिर से,पापा हम तुम्हें बुलाते हैं।
याद आपकी जब-जब आती, नैना बहु नीर बहाते हैं।।
सबकुछ जीवन में है मेरे,पर कमी आपकी खलती है।
तुम बिन अन्तर्मन में मेरे,इक तन्हाई सी पलती है।
याद आपकी जब-जब आती,तन मन व्याकुल हो जाता है।
कितनी कोशिश करें मगर पर,उर चैन नहीं मिल पाता है।
रह-रह कर अन्तर्मन में बस,दुख के घन बादल छाते हैं।
याद आपकी जब-जब आती, नैना बहु नीर बहाते हैं।।
पास नहीं बेशक हो मेरे,पर उर के निकट हमारे हो।
भले दूर हो हमसे पापा, फिर भी हमको अति प्यारे हो।
श्रद्धावत् चरणों में निशदिन,झुकता यह शीश हमारा है।
रक्षा कवच के रूप संग में,रहता आशीष तुम्हारा है।
अनुसरण आपके वचनों का, करके ही कुछ कर पाते हैं।
याद आपकी जब-जब आती, नैना बहु नीर बहाते हैं।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)