मुक्तक
मुक्तक
ज़िंदगी की क़िताब पढ़ते हैं
दिल के कागज़ पे चित्र गढ़ते हैं
गलतियों को डिलीट कर खुद ही
सीढ़ियाँ हम शिखर की चढ़ते हैं
डॉ. अर्चना गुप्ता
मुक्तक
ज़िंदगी की क़िताब पढ़ते हैं
दिल के कागज़ पे चित्र गढ़ते हैं
गलतियों को डिलीट कर खुद ही
सीढ़ियाँ हम शिखर की चढ़ते हैं
डॉ. अर्चना गुप्ता