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15 Sep 2025 · 1 min read

सीधी सट्ट-७९२

सच बोलने वाला स्वार्थ में सच नहीं बोलता, उसमें तो झूठे अधिक पारंगत होते हैं। वह उसकी मानवीय वचनबद्धता है। समय समय पर हर व्यक्ति उसके विरोध में दिखाई पड़ता है, आप भी उस पंक्ति में खड़े हो गए तो क्या आश्चर्य!
एक सच यह है कि यदि आप दल/दफ्तर के मुखिया से निकटता होने के कारण अन्य कर्मचारी/अधिकारी की बात को हवा में उड़ाते हैं और आपके कार्य दूसरों की कार्य-गठरी को बोझिल बनाते हैं तो निश्चित ही पाप इकट्ठा कर रहे हैं जैसे गुटखा खाने वाला उसे बिना थूके नित्य करता है।

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