बारिश की बूँद
जाती बारिश की सहमी बूंदें
बरस रहीं देखो थम-थम कर
जाने वाले का अंतस बदला
रफ्तार थमी है आज सहमकर।
बूँदों की ताकत सब जाने
बारिश की शक्ति पहचानें
देश-विदेश सब जल में डूबे
क्या जाने,क्या-क्या पहचानें।
विकल हो गयी सारी दुनिया
इस बारिश ने सबको तड़पाया
कई गाँव,शहर,उजड़े,बिखरे
जलमग्न हुए सब खूब सताया।
उफनी सब नदियाँ,सागर उछले
जगत लीलने को तैयार
कई पर्वत की साँसें डोली
आया भूभृत कर सीमा पार।
धरती काँपी,हिल उठा व्योम
देखा बारिश का रौद्र रूप
अब जाने की बेला आयी
बदला अब तो रूप अनूप।
सब आते हैं सब जाते हैं
प्रकृति ने सबको बांधा है
गर्जन-तर्जन की भी सीमा है
सुख पूरा तो दुःख आधा है।
सहमो ऐ बारिश की बूँदे!
अपने कर्मों पर लज्जित हो
फिर एक वर्ष बाद तुम आना
संस्कारों से सज्जित हो।
कभी विनाश की बात ना करना
अपना स्वरूप विकराल न करना
सुंदरता की परिभाषा
ऐ बूँद! सदा तुम सुंदर रहना।
—-अनिल कुमार मिश्र,राँची,झारखंड।