ले जावो उसको तुम मधुशाला
अगर तुमको करना है सच का पता, ले जावो उसको तुम मधुशाला।
वह झूठ उसमें कुछ भी नहीं बोलेगा, सच बोलेगा पीकर वह प्याला।।
अगर तुमको करना है सच का पता————–।।
कुछ करते हैं चोरी-छुपकर काम, सच होता नहीं मालूम उनका।
करके पर्दे में सच का सौदा, करना है यह शगल प्यारा उनका।।
मानेंगें नहीं वह अपराध अपना, पूछेंगे कसूर क्या हमने कर डाला।
अगर तुमको करना है सच का पता—————-।।
मिलेगा तुमको यहाँ हर जगहां, आबाद चमन बटमारों का।
नजर आयेंगे खुश वो यहाँ, जो रखते हैं शौक बहारों का।।
मिलेगा नहीं वहाँ कोई दाग, करते हैं धारण जहाँ दुहशाला।
अगर तुमको करना है सच का पता—————–।।
यह प्यार, वफ़ा और याराना, यहाँ बिकते हैं बाजारों में।
जो समझे किसी का दर्द यहाँ, दिखता है एक हजारों में।।
जहाँ देते हैं धोखा रब को भी, पावोगे कैसे वहाँ धर्मवाला।
अगर तुमको करना है सच का पता—————।।
तैयार है यहाँ हर कोई, करने को लहू मतलब के लिए।
जहाँ लूट रहे हैं अपनों को, अपने सुख-दौलत के लिए।।
यह राह नहीं अपनी छोड़ेंगे, क्योंकि अदब है इनका निराला।
अगर तुमको करना है सच का पता—————–।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)