मैं खुद को परिभाषित करूं तो शब्द कम लग रहे,
मैं खुद को परिभाषित करूं तो शब्द कम लग रहे,
पर फिर भी यदि एक लाइन ही लिखना है तो….
मैं अनुशासन एवं जिज्ञासा की अविरल धारा हूं
जिसे सफलताओं के सागर से मिलना है।।
मैं खुद को परिभाषित करूं तो शब्द कम लग रहे,
पर फिर भी यदि एक लाइन ही लिखना है तो….
मैं अनुशासन एवं जिज्ञासा की अविरल धारा हूं
जिसे सफलताओं के सागर से मिलना है।।