कल किसने देखा है यहां पर
कल किसने देखा है यहां पर
चलो आज में जी ले हम
कल क्या जाने क्या क्या होगा
आज में खुशियां डूढ़े हम
छूट गया जो आज यहां पर
कल वो तुम्हे मिलेगा नही
जो मिला है उसका जश्न मनायें
न कभी भाग्य पर रोये हम
और रोने से कुछ होता है क्या
जब होता नही तब क्यों रोयें हम
सुख दुख जीवन के दो पहलू
इन दोनो को स्वीकारें हम
रूबी चेतन शुक्ला