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वेल्स इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी एवं एडवांस स्टडीज, चेन्नई तथा बोहल शोध मंजूषा जर्नल का सेमीनार संपन्न
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भिवानी (हरियाणा)। के संयुक्त तत्वावधान में 13 व 14 सितम्बर 2025 (हिंदी दिवस) को भिवानी स्थित संस्था सभागार एवं ऑनलाइन माध्यम से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी “21वीं सदी का साहित्य : नव विमर्श” सफलतापूर्वक आयोजित की गई।
संगोष्ठी में पर्यावरण विमर्श, नारी विमर्श, किसान विमर्श, किन्नर विमर्श, हिंदी भाषा विकास सहित समकालीन साहित्य के विविध आयामों पर सारगर्भित चर्चा हुई। इस अवसर पर देश-विदेश से 150 से अधिक प्राध्यापक, शिक्षाविद एवं शोधार्थियों ने सहभागिता करते हुए अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
13 सितम्बर 2025 के सत्र की अध्यक्षता डॉ. सुशीला आर्या (सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी) ने की। स्वागत भाषण डॉ. दिनेश सोनी ने दिया। मुख्य वक्ताओं में डॉ. ऋतु शर्मा (नीदरलैंड), डॉ. राजकुमारी शर्मा (दिल्ली), डॉ. संजय कुमार (रांची), डॉ. वर्षा रानी (आगरा) तथा डॉ. मोहम्मद सलीम (दिल्ली) प्रमुख रहे। मंच संचालन डॉ. मुकेश कुमार ‘ऋषि वर्मा’ ने किया जबकि डॉ. नरेश सिहाग एडवोकेट ने आभार व्यक्त किया।
14 सितम्बर 2025 के सत्र की अध्यक्षता डॉ. वी. पद्मावती (कोयंबटूर) ने की। स्वागत भाषण डॉ. पूर्णिमा श्रीनिवासन (चेन्नई) तथा अध्यक्षीय भाषण प्रो. डॉ. पी षणमुख सुंदरम, डीन, स्कूल ऑफ़ फार्मास्यूटिकल साइंसेज एवं निर्माता, इंस्टीट्यूशन कोलैबोरेशन , वीआईएसटीएएस, चेन्नई) ने दिया। आमंत्रित वक्ताओं में डॉ. कुमारी लक्ष्मी जोशी (काठमाण्डू, नेपाल), डॉ. अजयपाल सिंह (पंजाब), डॉ. मोहम्मद रियाज खान (बेंगलुरु), डॉ. राकेश शंकर भारती (यूक्रेन) एवं डॉ. सीएच. वी. महालक्ष्मी (आंध्र प्रदेश) शामिल रहे। साथ ही डॉ. शिवकरण निमल (राजस्थान) ने महिला बचत एवं आर्थिक योगदान पर सारगर्भित विचार रखे। मंच संचालन डॉ. नरेश सिहाग एडवोकेट ने किया तथा आभार डॉ. अनुराधा पी. (चेन्नई) ने व्यक्त किया।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि “21वीं सदी का साहित्य सामाजिक बदलावों और बहुविमर्शीय दृष्टिकोण का आईना है।”
डॉ. नरेश सिहाग एडवोकेट (सम्पादक, बोहल शोध मंजूषा) ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियाँ भविष्य के साहित्यिक विमर्शों को नई दिशा देती हैं।
कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु डॉ. इशारी के. गणेश (संरक्षक), डॉ. पूर्णिमा एस. (संयोजक), डॉ. अनुराधा पी. व सुश्री वी. अमुधा (सह संयोजक) तथा डॉ. मुकेश कुमार ऋषि वर्मा (व्यवस्थापक) के सहयोग को विशेष सराहा गया। इसके साथ ही हिंदी सेवी महानुभावों को हिंदी रत्न सम्मान भी प्रदान किया गया। उक्त सम्मान बृजलोक साहित्य कला संस्कृति अकादमी, उ.प्र. के सौजन्य से दिया गया। कार्यक्रम पूर्णतः सफल रहा।