पिंजरा अल्फाज़ का
पिंजरा अल्फ़ाज़ का जब भी खोला जाए
एहतियात से समझ कर ही बोला जाए
आपकी तरबियत का आईना होते हैं अल्फ़ाज़
नर्म लहजे में क्यूं न रंग प्रेम का चोला जाए।
एहतराम दूसरों का शख्सियत उभार देता है
मीठे अल्फाजों से दिल किसी का टटोला जाए।
हर किरदार को इक वज़न देते है ये लफ्ज़
क्यूं न हर शब्द तराजू में पहले तोला जाए
सर्द लहजे से अक्सर कांप उठती है रूहें
पिंजरा अल्फाजों का प्यार से ही खोला जाए।
सुरिंदर कौर