लड़ाई अपनी तुम्हें ही लड़नी होगी
लड़ाई अपनी तुम्हें ही लड़नी होगी
लड़ाई अपनी तुम्हें ही लड़नी होगी,
जीवन की भीड़ में अकेले कदम बढ़ाने होंगे।
पथ निशानी है — कांटों से भरा हर रास्ता,
तरुण, उन कांटों पर भी तुम्हें ही गुजरना होगा।
कभी कोई कंटक पग में चुभ जाएगा,
पीड़ा सन्न रहेगी — उसे सहकर तुम मुस्कुराना होगा।
हज़ारों चेहरे, पर हौंसला तुम्हारा एक दीपक,
अँधेरों में तुम्हें ही अपना दीप जलाना होगा।
क्षणभंगुर है जीवन — विदा का घड़ी आता है,
आशियाँ बनाकर भटकना अब मत सोचना।
दुश्वारियाँ, धर्म-संकट — सब आते हैं परीक्षा में,
अपने हृदय की सच्ची आवाज़ को सुनना होगा।
मुट्ठी भर रेत सी यह ज़िन्दगी है तिमिर,
कस कर रखोगे तो एक-एक कण बिखर जाएगा।
लोग क्या कहेंगे, पर थोड़ा ऊपर उठकर देखो —
कर्तव्य पथ पर सदा बढ़ना ही तुम्हें होगा।
चलो, तूफानों से टकराने का जिगर पहन लो,
हर ख़ामी में भी अपनी एक चमक जगाना होगा।
जब राहें कठिन हों और सहारे न मिलें,
तुम्हारी लड़ाई — तुम्हें ही, हौसलों से लड़ना होगा।
मुकेश शर्मा विदिशा