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14 Sep 2025 · 1 min read

कुंडलिया. . .

कुंडलिया. . .

धागे मन्नत के लगे, पीपल के चहुँ ओर ।
कैसी यह विश्वास की, रंग बिरंगी डोर ।।
रंग बिरंगी डोर , करे कब इच्छा पूरी ।
होते विफल प्रयास , रहे हर माँग अधूरी ।।
पागल मनवा नित्य, ईश के द्वारे भागे ।
मन्नत कैसे पूर्ण , करेंगे कच्चे धागे ।।

सुशील सरना / 14-9-25

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