हिंदी भाषा में बोलने से जो अपनत्व और जुड़ाव महसूस होता है, द
हिंदी भाषा में बोलने से जो अपनत्व और जुड़ाव महसूस होता है, दुनिया के किसी भी भाषा में बात करने से ऐसा महसूस नहीं होता होगा।
हम जिस देश में जन्मे हैं वहां सैकड़ों भाषाएं और हजारों बोलियां हैं फिर भी हिंदी हमारी अपनी बेहद सहज घर की भाषा है।
ये वो भाषा है जिसमें हमने पढ़ाई लिखाई की है।
जी हां , बिल्कुल वही भाषा जिसमें लिखी कहानियों और किस्सों को पढ़ के हम अपने कल्पनाओं की उड़ान और ऊंची कर लेते हैं।
हिंदी भाषा हमारे पड़ोसी और हमको एक कर देती है।
हिंदी भाषा वो मां है जो सभी बच्चों को अपने आंचल के छांव में एक साथ रखती हैं।
हम हिंदी हैं
हिंदी हमारा भाव!
हिंदी हमारे भाल की लाली
इसमें बोलते बतियाते हैं भाग्यशाली!
हिंदी हमारा है मिज़ाज और नाज़
बनी रहे ये यूहीं हमारी ताज़!
हिंदी के बच्चें हैं हम, हिंदी ने हमको पाला
दुनियावालों हमेशा रहे हिंदी का बोलबाला।
#निवेदिता रश्मि