*राष्ट्रभाषा की मांँग है हिन्दी*
राष्ट्रभाषा की मांँग है हिन्दी
तू ही मेरी सोच पहुंँच, तुझसे अभिव्यक्ति।
तुझसे भाव तुझसे राग, गाए हर व्यक्ति।
तू मीतो में तू गीतों में, हर शब्द हर बात में तू।
सरल शब्द भाषा परिभाषा, वर्ण-वर्ण की पहचान है हिन्दी।
राष्ट्रभाषा की मांँग है हिन्दी।।१।।
अदब सिखाए हिन्दी हमको, सिखाये शिष्टाचार।
तू ही मेरी बोली भाषा, तुझसे सदाचार।
कई बोलियो की है तू मालिक, लगती तू बेजोड़ी।
पापा की डांँट है तू मांँ जी की लोरी, नानी-दादी का गान है हिन्दी।
राष्ट्रभाषा की मांँग है हिन्दी।।२।।
बढ़े क्षेत्र हो विस्तृत, हिन्दी का मान बढ़ाओ तुम।
न्यायालय में अंग्रेजी क्यों, इतना तो बताओ तुम?
हिन्दी राष्ट्रभाषा क्यों नहीं, उत्तर देते जाओ तुम?
दुष्यन्त कुमार लिखता हिन्दी में,बनेगी एक दिन शान ये हिन्दी।
राष्ट्रभाषा की मांँग है हिन्दी।।३।।