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14 Sep 2025 · 3 min read

कमेंट

व्यंग्य

कमेंट

टांग टूट गई…?
-अरे। कब कैसे। कहां? हम आएं क्या? कुछ लाएं क्या? कहीं फंसा ली होगी? दूसरी तो ठीक है? भैया, आराम करो? वाकई, बहुत दर्द होता है। मेरी भी टूट चुकी है ( पिक्चर सेंड)

केस 2
चाय में पत्ती पहले पड़ेगी या दूध?
-कुछ भी डाल लो। चाय ही बनेगी। हम तो पानी बाद में डालते हैं। लिंक देखो। इतनी सी पोस्ट पर 1.2 k कॉमेंट।

केस 3
आज मैं जा रहा हूं?
-अभी से जा रहे हो? ऐसी निराशा क्यों? यह अच्छी बात नहीं। जिंदगी जियो। हमको भी साथ ले लो। हम भी चलेंगे। जब पहुंच जाओ वहां की पिक भेजना। ओ, जाने वाले हो सके तो लौट के आना।

केस 4
लोन लौटाने का मन नहीं। क्या करूं?
– बहुत से विकल्प हैं। आप कहीं भी भाग सकते हैं। बहुत से लोग पहले भी भाग चुके हैं। भैया, एक बार बैंक के पेपर चेक कर लेना। ये सिंग्नेचर बहुत कराते हैं। खुद पढ़ते नहीं। अच्छा, कहां जाओगे? भैया, लोन लो और घी पियो?

केस 5
भाग गई?
Hahaha. भाभी भाग गई? चेक करो। पीहर गई होगी। यहां तो नहीं आई। चार घंटे वेट करो। नहीं आई तो एफआईआर कराओ। भैया भाभी भागी या बकरी? बहुत दुखद। भागने का दर्द हम समझ सकते हैं। कोई घर से भागे या देश से या दिल से, दुख होता है। ( इमोशनल मैसेज)

ये कुछ उदाहरण हैं। मूलधन से ब्याज भारी होता है। बीबी से ज्यादा बच्चे प्यारे होते हैं। साले से ज्यादा सलज प्यारी होती है। पोस्ट से ज्यादा कमेंट प्यारे होते हैं। पहले कॉमेंट पढ़िए। फिर पोस्ट पढ़िए। फिर उसी के अकॉर्डिंग आप
कॉमेंट लिख दीजिए। अगर कोई कॉमेंट
नहीं तो आप भी अंगूठा दिखा दीजिए।
श्रीदेवी की जगह ललिता पंवार का फोटो चेप दीजिए। कॉमेंट अपने आप आ जाएंगे। असरानी के मरने की झूठी खबर फैला दीजिए। एक ने लिख दिया..RIP तो सब वही लिखेंगे। इसी को हिन्दी में भेड़ा चाल कहते हैं। एक जिधर मुड़ गया। सब उधर मुड़ेंगे।
यहां की सर्विस बहुत फास्ट है। आप ने पोस्ट डाली 9.34 बजे। इसी वक्त 9.34 पर 10
कॉमेंट। यह रैपिड से भी तेज स्पीड है।

हम भारतीयों की एक आदत बहुत बुरी है। बिना देखे साइन मार देते हैं। फिर फंसते हैं। जीवन भर रोते हैं। पहले अक्सर ऐसा होता था। दिखाई कोई। लाया कोई। अब देखकर समझकर लाते हैं। लेकिन इंस्टा या फेसबुक पर लुट जाते हैं। कॉमेंट में फंस गए।
कॉमेंट कभी भी कहीं भी कैसा भी आ सकता है। इसमें बुरा नहीं मानना चाहिए। इस हाथ ले। उस हाथ दे। जब भी मौका मिले, कॉमेंट पास करते रहना चाहिए। इससे प्रैक्टिस होती है। ज्ञान बढ़ता है। जरा से अभ्यास से आप निपुण होते हैं। किसी को उठाने, गिराने, सजाने, संवारने, पुचकारने, दुत्कारने, वोटिंग परसेंटेज बढ़ाने का काम घर बैठे कर सकते हैं।

कम शब्दों में अपनी बात कहने की आदत डालो। अब वक्त कम है। वक्त की नजाकत समझो। जीवन कहीं भी ठहरता नहीं है। उलझे रहो। उलझना ही जीवन की बुनियाद है।
सुनो जी…! कितना प्यारा मीठा शब्द है। इसमें पूरा ब्रह्माण्ड है। दो शब्दों में रहस्यवाद। प्रकृति का मानवीयकरण। इससे छोटा शब्द क्या हो सकता है?….भाग गई???? या मेरे प्यारे…!

सूर्यकांत
14.09.2025

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