Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
14 Sep 2025 · 2 min read

*अभिलाषाएँ*

अभिलाषाएँ

कुछ पाने की हार्दिक इच्छा, चाँद तारों को छूने की आशा अथवा कुछ कर गुजरने की दिली चाह ही अभिलाषाएँ हैं। हाँ, भावी महत्वाकांक्षाएँ भी इसी श्रेणी में आती हैं। इसी तारतम्य में सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है श्रद्धेय माखनलाल चतुर्वेदी की “पुष्प की अभिलाषा”…
मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर तू देना फेंक,जिस पथ जाए वीर अनेक।
अभिलाषाओं के बिना जीवन अधूरा है। वैसे कहते हैं कि संतोषी सदा सुखी। यह भी कहा जाता है… जो हमारे पास है उसी में संतुष्ट रहो किन्तु जो तुम हो उसमें तुष्टि ना हो। सही भी है क्योंकि यह संतुष्टि वाली सोच प्रगति के सारे रास्ते बंद कर देती है। हमारी अभिलाषा कभी सुप्त नहीं हो। किन्तु प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ में कभी-किभी किसी का अहित न हो। हमारे साधन भी स्वार्थरहित हो, एक पाक-साफ़ साधना जैसे। जल्दी का काम शैतान का। शान्ति से चलता हुआ कछुआ भी जीत सकता है। अपने गणु भाई भी सात्विक सूझ-बूझ से कार्तिकेय भैया से जीत गए थे।
अभिलाषाएँ करना कभी नहीं छोडो। अपने कलाम साहब भी कह गए हैं… सपने अवश्य देखो। किन्तु उन्हें पूरा करने के लिए जी जान से प्रयास करते रहो। सर्वप्रथम लक्ष्य निर्धारित करो। तदनुसार योजनाबद्ध तरीके से बिंदु दर बिंदु आगे बढ़ो।” धीरूभाई अंबानी ने एक छोटी इकाई से श्रीगणेश कर बुलंदियों को छू लिया।
जी, कोशिश करनेवालों की कभी हार नहीं होती, मंज़िल चाहे ना मिले पर फ़ासले घट जाएँगे। जज़्बा, जुनून व जिजीविषा हमेशा बने रहे। कौन कहता है आसमान में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।
सिर्फ़ अभिलाषा करना यानी मात्र एक सपना देखना है। यह पर्याप्त नहीं है। मन के लड्डू फोड़ते रहो जैसे मिया शेखचिल्ली किया करते थे।
जो भी आशाएँ, आकांक्षाएँ हम करते हैं, उसमें दो-तीन विकल्प रखना चाहिए। बचपन से मन बना लिया डॉक्टर बनना ही है। नहीं बन पाने की स्थिति में मानसिक तनाव से गुज़रते हैं। इससे तो अच्छा है, यह नहीं तो कोई और ही सही। राहें कई हैं, बस चलते रहना है। एक दिन मंज़िल अवश्य मिलेगी।
सरला मेहता
इंदौर

Loading...