राष्ट्रीय परिपक्व महिला दिवस
राष्ट्रीय परिपक्व महिला दिवस
यह दिवस प्रत्येक वर्ष 9 अप्रैल को मनाया जाता है। यह परिपक्व उम्रदराज़ महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक विशेष दिवस है। अमूमन समाज का रवैया उम्रदराज लोगों के प्रति कठोर होने लगता है। इस दिन के माध्यम से बड़ी उम्र की महिलाओं को यह एहसास कराया जाता है कि वे अपनी बढ़ती उम्र के बावजूद खुद के बारे में अच्छा कैसे और किस तरह से महसूस कर सकती हैं। यह सभी बुजुर्ग होती महिलाओं की समझदारी और बुद्धिमत्ता को पहचान देने का एक विशेष दिन है।
उम्र के अंतिम पड़ाव पर ज़िन्दगी गुज़ारने वाली महिलाओं की योग्यता और अनुभवों का दोहन होना चाहिए। इनकी संदूकची में मुश्किलों व बीमारियों से निपटने, बचत करने व एक सहज ज़िन्दगी जीने के कईं नुस्खे लबालब भरे रहते हैं, बस इनसे पूछने भर की देर है। फ़िल्में जुआनिता, ग्लोरिया बेल और थ्री बिलबोर्ड्स जैसी फ़िल्मों में बड़ी उम्र की महिलाएँ जीवन की विभिन्न परिस्थितियों से कैसे निपटती हैं, यह बखूबी दिखाया गया है। अपने जीवन में खुद से बड़ी उम्र की महिलाओं के साथ कभी समय बिता कर देखें तो सही क्योंकि उम्र के साथ समझदारी आती है। इन उम्रदराज नानियों-दादियों के अनुभव व एहसास बस राह तकते रह जाते हैं कि कोई पूछे तो सही। फ़िर भी इन्हें निराशा का दामन छोड़ समाज में कहीं भी, कभी भी, जिसे भी ज़रूरत हो अपने अनुभव के आधार पर राय व सुझाव देते रहना चाहिए। सभी उम्रदराज महिलाओं से मेरा कहना है… अपनी उम्र का सौदा कुछ इस तरह करके देखिए…
उम्र का सौदा कर आई
सुकून भरे कुछ पल चुरा लाई
अपनी उम्र का सौदा कर आई
नहीं मानती ख़ुद को उम्रदराज़
उम्र को दराज़ में ही रख आई
सूरज की किरणों से
लाली उषा की उधार ले आई
बगिया की कलियों से
खुशबू मैं मुठ्ठियों में भर लाई
तितलियों के पंखों से
इंद्रधनुषी रंग पल्लू में भर लाई
नदियों की कलकल से
सप्तसुरों को शब्दों में भर लाई
बारिशी टिप-टिप बूँदों से
उमंगें सारी ख़्वाबों में भर लाई
खिलखिलाते बच्चों से
बचपन का सौदा कर आई
अनचाही यादें भुलाने को
मायूसियाँ सन्दूक में रख आई
गमों की गठरी अटाले में बेंच
राह में बिखरी खुशियाँ बटोर लाई
सरला मेहता