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14 Sep 2025 · 1 min read

हम मुहब्बत कर न पाएं इतनी मंहगाई नहीं।

हम मुहब्बत कर न पाएं इतनी महँगाई नहीँ।
चाह लें तो पास अपने आये तन्हाई नहीँ।
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हुस्नो जवानी साथ देंगे ये हमारा वहम है।
कौन सी वह कली है जो खिल के मुरझाई नहीँ।
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दूसरे दिन जाके मैंने राख में ढूढ़ा बहुत।
अशर्फियों की बात छोड़ो उसमे थी पाई नहीँ।
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तंग न हो कुछ जगह पर कुछ जगह चुभती न हो।
जिंदगी ने ऐसी इक पोशाक पहनाई नहीँ।
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जो मुहब्बत और भरोसे से न पूरी भर सके।
खोज लीजे इस जहां में ऐसी इक खाई नहीँ।
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Kumar Kalhans

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